JHAHIN/2014/58773

दुमकाः आदिवासी मूलवासी एकता मंच का महाजुटान 31 अक्टूबर को

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दुमका। झारखंड के दुमका स्थित ऐतिहासिक गांधी मैदान में शनिवार को आदिवासी मूलवासी एकता मंच  द्वारा एक विशाल लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण रैली का आयोजन किया जाएगा। इस रैली का मुख्य उद्देश्य जल-जंगल-जमीन, जन-अधिकारों की रक्षा और संवैधानिक मूल्यों को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट करना है। मंच ने राज्य सरकार और मीडिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए छह प्रमुख मुद्दों को रेखांकित किया है।

मतदाता सूची में गड़बड़ी और परिसीमन पर गहरी चिंता

संगठन ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण  में भारी विसंगतियों का आरोप लगाया है। मंच के अनुसार, लगभग 41 लाख मतदाताओं के नाम कथित तौर पर अनुपस्थित पाए गए हैं, जबकि दुमका में ही 1 लाख से अधिक वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका जताई गई है। इसके अलावा, निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन  को लेकर भी रोष है। मंच का कहना है कि प्रशासनिक हेरफेर से आदिवासियों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और पांचवीं व छठी अनुसूची के क्षेत्रों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

एमएमडीआर संशोधन अधिनियम 2026 का विरोध

 केंद्र सरकार के खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 पर भी तीखा हमला बोला गया है। संगठन का दावा है कि यह कानून झारखंड जैसे खनिज-संपन्न राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और संघीय व्यवस्था पर चोट करता है। इससे राज्य सरकारों की कर लगाने की शक्तियाँ सीमित हो रही हैं, जिससे स्थानीय समुदायों में गरीबी, विस्थापन और पर्यावरण विनाश की समस्या और गंभीर हो गई है।

महिला सुरक्षा, शिक्षा और स्थानीय युवाओं को रोजगार की मांग

मंच ने झारखंड में हाल के दिनों में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ बढ़ती यौन हिंसा की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए दोषियों को कड़ी सजा देने और पीड़ित परिवारों को न्याय व सुरक्षा देने की मांग की है। इसके साथ ही, आदिवासी व मूलवासी विद्यार्थियों के लिए समय पर छात्रवृत्ति, छात्रावासों की मरम्मत और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की व्यवस्था करने तथा खनन कंपनियों में स्थानीय युवाओं को रोजगार में उचित प्राथमिकता देने की पुरजोर वकालत की गई है।

जनता और सरकार से एकजुट होने की अपील

मंच के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ये मुद्दे किसी एक जाति, धर्म या दल विशेष के नहीं हैं, बल्कि यह पूरे झारखंड के भविष्य, सामाजिक न्याय और लोकतंत्र से जुड़ा मामला है। संगठन ने सभी नागरिकों से अपनी धार्मिक और राजनीतिक संबद्धता से ऊपर उठकर संवैधानिक मूल्यों, न्याय और भाईचारे की रक्षा के लिए इस रैली में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है।

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