नई दिल्ली। सप्ताह के पहले ही दिन भारतीय शेयर बाजार से निवेशकों के लिए बेहद निराश करने वाली खबर सामने आई है। सोमवार को बाजार खुलते ही दलाल स्ट्रीट पर भारी बिकवाली का दौर शुरू हो गया, जिससे घरेलू शेयर बाजार धड़ाम हो गया। वैश्विक बाजारों से मिले बेहद खराब संकेतों के कारण शुरुआती कारोबार में ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सूचकांक सेंसेक्स करीब 750 अंक टूट गया। वहीं दूसरी ओर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी अपने 23,000 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे लुढ़क गया है। बाजार की इस जोरदार गिरावट में लार्जकैप से लेकर स्मॉलकैप तक, हर श्रेणी के अधिकांश शेयर लाल निशान पर कारोबार कर रहे हैं।
गिरावट की सबसे बड़ी वजह: अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चा तेल
बाजार के जानकारों का मानना है कि इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे प्रमुख वजह वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में अचानक भारी उछाल आया है।
चूंकि भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का महंगा होना भारतीय अर्थव्यवस्था और कंपनियों के मुनाफे के लिए बड़ा झटका माना जाता है। तेल महंगा होने से देश में महंगाई बढ़ने और चालू खाता घाटा बिगड़ने का डर पैदा हो गया है, जिसने निवेशकों के भरोसे को डिगा दिया है।
चौतरफा बिकवाली से निवेशकों में घबराहट
सोमवार के कारोबारी सत्र में बाजार का मूड पूरी तरह बिगड़ा हुआ नजर आ रहा है। बैंकिंग, ऑटो, आईटी और रियल्टी सेक्टर के दिग्गज शेयरों में सबसे ज्यादा मार पड़ी है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, इंफोसिस और आईसीआईसीआई बैंक जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में 2 से 3 फीसदी तक की गिरावट देखी जा रही है। केवल कुछ चुनिंदा फार्मा और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों को छोड़कर बाजार के लगभग सभी सेक्टर्स में निवेशक लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं।
निवेशकों के लिए एक्सपर्ट्स की सलाह
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण बाजार में आने वाले कुछ दिनों तक भारी उतार-चढ़ाव (Volatility) देखने को मिल सकता है। ऐसे माहौल में खुदरा निवेशकों को किसी भी तरह की जल्दबाजी या घबराहट में आकर अपने शेयर बेचने से बचना चाहिए। जानकारों के मुताबिक, यह समय बाजार में बड़ी एकमुश्त रकम लगाने का नहीं है, बल्कि अच्छे और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए धीरे-धीरे निवेश करने का है।














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