रांची। झारखंड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (JSSC-CGL) पेपर लीक मामले में सीआईडी की विशेष जांच टीम ने अदालत में केस डायरी पेश करते हुए एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा किया है, जिसने पूरी परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सीआईडी की तफ्तीश में यह सनसनीखेज सच सामने आया है कि जिस गोपनीय प्रिंटिंग प्रेस को प्रश्नपत्र और ओएमआर (OMR) शीट छापने की जिम्मेदारी मिली थी, वहां के कर्मचारियों ने ही खुद इस परीक्षा में हिस्सा लिया।
सवाल-जवाब रटकर ‘समीर‘ बन गया था सहायक अनुभाग अधिकारी (ASO)
सीआईडी के अनुसार, इस पूरे खेल का मुख्य जरिया प्रश्नपत्र छापने वाली एजेंसी का अंदरूनी कर्मी समीर कुमार और राहुल कुमार बने। जांच में स्पष्ट हुआ है कि जेएसएससी को बिना कोई जानकारी दिए प्रश्नपत्र छपाई का काम सब-कॉन्ट्रैक्ट पर ट्रांसफर किया गया था। हरियाणा के मानेसर और राजस्थान स्थित प्रिंटिंग सेंटरों में छपाई के दौरान राहुल कुमार ने प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी को व्हाट्सएप के जरिए अपने साथियों तक लीक किया। वहीं, समीर कुमार ने परीक्षा से ठीक पहले प्रश्नपत्र और उसके सभी उत्तरों को पूरी तरह से कंठस्थ (रट) कर लिया था। इस अवैध पहुंच का फायदा उठाकर समीर ने परीक्षा दी और वह मेरिट लिस्ट में सहायक अनुभाग अधिकारी (ASO) के प्रतिष्ठित पद पर चयनित होने में भी कामयाब हो गया था। सीआईडी ने समीर के बैंक खातों की वित्तीय पड़ताल की है, जिसमें यूपीआई (UPI) के जरिए कई संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के पुख्ता सबूत मिले हैं।
बोकारो बना धांधली का मुख्य केंद्र, नियुक्तियों के लिए वसूले गए लाखों
जांच एजेंसी ने खुलासा किया है कि बोकारो के दुग्धा स्थित बीसीसीएल कॉलोनी को इस पेपर लीक का मुख्य केंद्र बनाया गया था. सीआईडी ने बोकारो से दलाल और एजेंट मिथिलेश कुमार पांडेय और रितेश कुमार सिंह को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों ने झारखंड और बिहार के अलग-अलग जिलों से आए अभ्यर्थियों को गुप्त ठिकानों तथा होटलों में ले जाकर परीक्षा से पहले ही प्रश्न-उत्तर रटवाए थे। प्रत्येक अभ्यर्थी से इस सेटिंग के बदले 12 से 15 लाख रुपये तक की मोटी रकम वसूली गई थी। सीआईडी की केस डायरी के मुताबिक, परीक्षा के दिन धनबाद और अन्य केंद्रों पर परीक्षा शुरू होने से पहले ही मोबाइलों पर प्रश्नपत्र आ चुके थे।
कार्रवाई जारी: अब तक 38 गिरफ्तारियां
झारखंड हाई कोर्ट की निगरानी में चल रही इस हाई-प्रोफाइल जांच के तहत सीआईडी का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। सीआईडी की एसआईटी अब तक परीक्षा माफिया, को-ऑर्डिनेटर, कोचिंग संचालकों और धांधली से सफल हुए अभ्यर्थियों समेत कुल 38 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। गिरिडीह, देवघर और बोकारो में सीआईडी की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं तथा फरार चल रहे मास्टरमाइंड और अन्य अप्राथमिकी अभियुक्तों के घरों पर इश्तेहार चिपकाकर सरेंडर करने का दबाव बनाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े रसूखदार चेहरों पर गाज गिर सकती है।














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