नेमरा (रामगढ़)। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक दिवंगत शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन का अंतिम संस्कार गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को दोपहर में उनके पैतृक गांव नेमरा में पूरे राजकीय सम्मान के साथ संपन्न हुआ। 80 वर्ष की आयु में रांची के एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान बुधवार रात उनका निधन हो गया था। उनके चले जाने से न सिर्फ सोरेन परिवार बल्कि पूरे झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में गहरे शोक की लहर है।

रांची से नेमरा तक अंतिम यात्रा, समर्थकों ने दी श्रद्धांजलि
आज सुबह स्वर्गीय रूपी सोरेन के पार्थिव शरीर को रांची के मोरहाबादी स्थित उनके आवास पर अंतिम दर्शनों के लिए रखा गया था, जहां पक्ष-विपक्ष के कई नेताओं और आम जनता ने उन्हें अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि दी। इसके बाद करीब 11 बजे उनके पार्थिव शरीर को सड़क मार्ग से रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड स्थित पैतृक गांव नेमरा लाया गया। जैसे ही उनका शव वाहन गांव पहुंचा, पूरा इलाका ‘रूपी सोरेन अमर रहें’ और ‘आखिरी जोहार’ के नारों से गूंज उठा।
नाड़ी दरहा घाट पर संथाली रीति-रिवाज से अंत्येष्टि
नेमरा स्थित पैतृक आवास पर परिवार के सदस्यों द्वारा संथाली परंपरा के अनुसार अंतिम विदाई की रस्में पूरी की गईं। इसके बाद, पार्थिव देह को अंतिम संस्कार के लिए गांव के ही नाड़ी दरहा (ढेकानाला) घाट पर ले जाया गया। यह वही ऐतिहासिक स्थान है जहां पिछले वर्ष झामुमो के संरक्षक दिशोम गुरु शिबू सोरेन का भी अंतिम संस्कार हुआ था। ठीक उसी स्थान के समीप रूपी सोरेन की चिता को मुखाग्नि दी गई। झारखंड पुलिस के जवानों ने बिगुल की धुन के साथ उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर (राजकीय सम्मान) दिया।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और दिग्गजों का जमावड़ा
इस दुखद घड़ी में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उनके भाई बसंत सोरेन, कल्पना सोरेन और परिवार के अन्य सभी सदस्य मौजूद रहे। अंतिम क्रिया में शामिल होने के लिए राज्य मंत्रिमंडल के सभी मंत्रियों, सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई विधायकों सहित हजारों की संख्या में झामुमो कार्यकर्ता नेमरा पहुंचे थे। भीड़ और वीआईपी मूवमेंट को देखते हुए रामगढ़ जिला प्रशासन और जैप (JAP) की कई कंपनियों ने सुरक्षा, यातायात और पार्किंग की पुख्ता व्यवस्था संभाली थी।














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