झाड़ग्राम। परीक्षा देने के लिए दूसरे जिले या राज्य की दौड़ लगाने की मजबूरी खत्म करने के लिए जंगलमहल स्वराज मोर्चा ने देश के हर जिले में कम से कम एक स्थायी कंप्यूटर आधारित परीक्षा केंद्र बनाने की मांग की है। संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष अशोक महतो ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को ई-मेल के जरिए नीतिगत प्रस्ताव भेजकर ‘एक जिला-एक स्थायी कंप्यूटर आधारित परीक्षा केंद्र’ नीति लागू करने का सुझाव दिया है। प्रस्ताव की प्रति राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के महानिदेशक को भी भेजी गई है।जेएसएम के मुताबिक, संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई), राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (यूजीसी-नेट), स्नातक अभिरुचि परीक्षा (गेट), राष्ट्रीय प्रवेश एवं छात्रवृत्ति परीक्षा (नेस्ट) और टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान (टीआईएफआर) की परीक्षाओं के अलावा रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी), कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी), बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (आईबीपीएस), सामान्य प्रवेश परीक्षा (कैट) और सामान्य विधि प्रवेश परीक्षा (क्लैट) जैसी कई सारी परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित होती हैं।लेकिन झाड़ग्राम जैसे जिलों के अभ्यर्थियों को कई बार परीक्षा देने के लिए दूर के शहरों तक जाना पड़ता है। इससे यात्रा और ठहरने का खर्च बढ़ने के साथ परीक्षा से पहले थकान और मानसिक दबाव भी बढ़ता है। बेरोजगार होने के कारण यह अतिरिक्त खर्च छात्रों के लिए आर्थिक बोझ बन जाता हैं। हर जिले में स्थायी कंप्यूटर आधारित परीक्षा केंद्र होने से अभ्यर्थियों को दूर नहीं जाना पड़ेगा और यात्रा तथा ठहरने का अतिरिक्त खर्च भी कम होगा।”जेएसएम ने केंद्र सरकार से प्रस्ताव पर विचार करते हुए चरणबद्ध तरीके से देश के सभी जिलों में स्थायी कंप्यूटर आधारित परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था शुरू करने की मांग की है।
हर जिले में स्थायी कंप्यूटर आधारित परीक्षा केंद्र की मांग














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