कोलकाता। रेलवे फाटकों पर मानवीय चूक से होने वाले हादसों का खतरा कम करने के लिए दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। टुनिया स्टेशन के पास रेलवे फाटक संख्या 183 की सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाया गया है। अब यह फाटक स्टेशन मास्टर की अनुमति के बिना नहीं खोला जा सकेगा। फाटक बंद होने और उसके अवरोधक के सुरक्षित रूप से बंद होने की विद्युत पुष्टि भी स्टेशन तक पहुंचेगी।
चक्रधरपुर-राउरकेला रेलखंड के टुनिया-गोइलकेरा खंड में स्थित यह फाटक पहले गैर-संयुक्त व्यवस्था वाला था। इसकी निगरानी टेलीफोन और निजी संकेत संख्या के जरिए होती थी। फाटक की स्थिति बताने के लिए कोई अलग संकेत व्यवस्था भी नहीं थी। नई व्यवस्था में प्रकाश-तंतु आधारित रिले पुनरावर्तक के जरिए फाटक को टुनिया स्टेशन से जोड़ा गया है। अब स्टेशन पर फाटक की स्थिति लाल-हरे संकेत से लगातार देखी जा सकेगी। फाटक कर्मचारी को स्टेशन से ध्वनि संकेत के जरिए स्पष्ट निर्देश मिलेगा। इससे ट्रेन के गुजरने से पहले फाटक खुलने की आशंका कम होगी और स्टेशन मास्टर तथा फाटक कर्मचारी के बीच बेहतर तालमेल बनेगा। इस व्यवस्था में रेलवे ने पहले से उपलब्ध अप्रयुक्त प्रकाश-तंतु तार का इस्तेमाल किया है। इससे नई तांबे की तार बिछाने की जरूरत नहीं पड़ी। कम बिजली खपत और कम लागत में लागू यह व्यवस्था पूर्ण संयुक्त सुरक्षा प्रणाली की तुलना में किफायती विकल्प भी है। इससे रेलवे फाटक पर निगरानी, सुरक्षा और परिचालन नियंत्रण पहले से अधिक मजबूत होगा।














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