संतोष झा की विशेष रिपोर्ट
गोपीकांदर। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत अत्यंत पिछड़ी जनजातियों को पक्का मकान देने की सरकारी मुहिम में बिचौलियों की सेंधमारी का बड़ा मामला सामने आया है। गोपीकांदर पंचायत के खेड़ीबाड़ी पहाड़िया टोला में आवास निर्माण के नाम पर करीब 12 लाख रुपये के गबन का खुलासा हुआ है। स्थानीय स्तर पर अनियमितता की खबरें सामने आने के बाद प्रखंड विकास पदाधिकारी विजय प्रकाश मरांडी ने कड़ा रुख अपनाते हुए मामले की जांच कराई। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद अब आरोपी बिचौलिए रमेश देहरी के खिलाफ गोपीकांदर थाने में प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया है।
बीडीओ के निर्देश पर पंचायत सचिव विशेश्वर महतो ने खेड़ीबाड़ी पहाड़िया टोला पहुंचकर पीएम जनमन आवासों की जमीनी हकीकत परखी। इस भौतिक सत्यापन में सांवई देवी, मोनिका महारानी, हिरापुनी महारानी, मीनू महारानी, लखन कुंवर, सोनाई गृही, शांति महारानी, बुचनी देवी और राजकुमार मांझी समेत कुल 10 लाभुकों के आवासों में भारी धांधली उजागर हुई। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार इन लाभुकों के खाते में निर्माण के लिए 80 हजार से लेकर 1 लाख 80 हजार रुपये तक की राशि भेजी जा चुकी थी, लेकिन मौके पर निर्माण कार्य या तो आधा-अधूरा मिला या फिर शुरू ही नहीं किया गया था।
जांच के दौरान पीड़ित लाभुकों ने बताया कि उनके बैंक खातों में योजना की पहली और दूसरी किस्त की राशि आते ही गांव का ही रमेश देहरी वह पैसा अपने कब्जे में ले लेता था। उसने निर्माण कार्य पूरा कराने का जिम्मा खुद लिया था, लेकिन राशि निकालने के बाद काम ठप कर दिया। आवास निर्माण के निर्धारित मानकों और सरकारी प्रक्रियाओं को ताक पर रखकर इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया। गरीबों का पैसा बिचौलिए की जेब में जाने से लाभुक अब भी कच्चे और जर्जर मकानों में रहने को मजबूर हैं।
पंचायत सचिव विशेश्वर महतो ने बताया कि जांच प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और 10 लाभुकों की आवास राशि रमेश देहरी द्वारा गबन किए जाने की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। अब सभी संबंधित लाभुकों की ओर से थाना प्रभारी को लिखित शिकायत दी जा रही है। इसी आवेदन के आधार पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई के बाद अब ग्रामीणों में यह उम्मीद जगी है कि गबन की गई सरकारी राशि की जल्द रिकवरी होगी और उनके अधूरे मकानों का निर्माण कार्य पूरा हो सकेगा।














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