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अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में डॉ. त्रिपुरा झा को ‘विद्याविद रत्न पुरस्कार-2026’ से किया गया सम्मानित

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घाटशिला। दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का गुरुवार को समापन हो गया। घाटशिला कॉलेज में आयोजित 7 एवं 8 अक्टूबर को आयोजित इस अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक आयोजन में देश-विदेश के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं एवं विद्वानों ने विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए।

सेमिनार में जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय की शिक्षा संकाय की प्राध्यापिका एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय की समन्वयक डॉ. त्रिपुरा झा ने अपने शोध-पत्र “देववासी और आदिवासी: वैदिक वन परंपरा, प्रकृति चेतना और जनजातीय संस्कृति का अंतरसंबंध” का प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण किया।

अपने शोध-पत्र के माध्यम से डॉ. झा ने भारतीय वैदिक परंपरा में वन, प्रकृति और मानव के गहरे आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक संबंध को रेखांकित करते हुए देववासी एवं आदिवासी जीवन-दृष्टि के अंतर्संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति में वन केवल प्राकृतिक संसाधन का क्षेत्र नहीं, बल्कि ज्ञान, तप, साधना, प्रकृति-संरक्षण और आध्यात्मिक चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। जनजातीय समुदायों की प्रकृति-केंद्रित जीवनशैली, जैव विविधता के संरक्षण तथा प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की भावना को भी उन्होंने अपने शोध के माध्यम से प्रस्तुत किया।

डॉ. त्रिपुरा झा के शोध-पत्र और प्रस्तुतीकरण को सेमिनार में सराहना मिली। उनके अकादमिक योगदान एवं शोधपरक प्रस्तुति के लिए उन्हें “विद्याविद रत्न पुरस्कार-2026” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान सोना देवी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने अपने कर-कमलों से प्रदान किया।

इस अवसर पर उपस्थित शिक्षाविदों एवं शोधार्थियों ने डॉ. त्रिपुरा झा को सम्मान प्राप्त करने पर बधाई दी तथा उनके शोध एवं अकादमिक योगदान की सराहना की। यह सम्मान उनके निरंतर शैक्षणिक, शोधपरक एवं सामाजिक-सांस्कृतिक योगदान को मिली एक महत्वपूर्ण पहचान के रूप में देखा जा रहा है।

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