सरायकेला। झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले से खाकी को शर्मसार कर देने वाली एक बेहद संवेदनशील और खौफनाक वारदात सामने आई है। यहां गम्हरिया थाने के भीतर ही एक असहाय महिला के साथ दुष्कर्म और गंभीर उत्पीड़न को अंजाम दिया गया। इस मामले में पुलिस मुख्यालय के कड़े रुख के बाद एसपी मनोज स्वर्गियारी ने रविवार (1 नवंबर) की देर रात बड़ी कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी सहित 15 पुलिसकर्मियों को निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है, जबकि मुख्य आरोपी सिपाही समेत 3 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
यह सनसनीखेज मामला 29 अक्टूबर की रात का है। पीड़िता एक पारिवारिक विवाद की शिकायत दर्ज कराने गम्हरिया थाना पहुंची थी। रात अधिक होने के कारण ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मियों ने उसे थाने के ही एक सुरक्षा कक्ष में रुकने की सलाह दी। आरोप है कि देर रात करीब 12 बजे थाने में तैनात वायरलेस ऑपरेटर (सिपाही) नीरज लकड़ा ने कमरे में घुसकर महिला के साथ जबरन दुष्कर्म किया।
मामला दबाने की कोशिश, खुलासे के बाद हड़कंप
पीड़िता ने जब इस घिनौनी करतूत की शिकायत थाने में मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों से की, तो मामले को रफा-दफा करने और दबाने का प्रयास किया गया। इसके बाद पीड़िता ने सीधे सरायकेला एसडीपीओ अनुभव भारद्वाज से मिलकर न्याय की गुहार लगाई, जिसके बाद 31 अक्टूबर को मामले की आधिकारिक प्राथमिकी दर्ज की गई।
एसआईटी (SIT) का गठन और बड़ा एक्शन
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने तुरंत एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। एसआईटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर बड़ी कार्रवाई की गई। कर्तव्य में घोर लापरवाही बरतने और वारदात को छुपाने के आरोप में ऑन-ड्यूटी सब-इंस्पेक्टर मनोज कुमार साहू और मुंशी संतोष कुमार राय को भी गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं थाना प्रभारी संजय प्रसाद सहित थाने के कुल 15 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर लाइन हाजिर कर दिया गया है।
थाने जैसे सुरक्षित स्थान पर इस तरह की घिनौनी वारदात ने पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, पुलिस कप्तान द्वारा त्वरित सामूहिक सस्पेंशन और गिरफ्तारी की कार्रवाई ने यह संदेश जरूर दिया है कि अपराधियों को खाकी का कवच नहीं मिलेगा। पीड़िता का मेडिकल टेस्ट कराकर मामले की वैज्ञानिक जांच की जा रही है।













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