JHAHIN/2014/58773

जमशेदपुर का अफगानी कनेक्शन और मचा राजनीतिक घमासान

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 झारखंड की मतदाता सूची में विदेशी नागरिकों के नाम: लोकतंत्र की सुरक्षार गंभीर सवाल

जमशेदपुर। भारतीय लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव उसकी मतदाता सूची है — वही सूची जो नागरिकों के अधिकार और राष्ट्र की संप्रभुता की पहली रक्षा पंक्ति मानी जाती है। लेकिन जमशेदपुर से सामने आया ताजा मामला इस नींव में गहरे दरारों की ओर इशारा करता है। गोलमुरी (टुइलाडुंगरी) स्थित बूथ संख्या 286 की मतदाता सूची में तीन अफगानी नागरिकों — आसिल खान, मोहम्मद असलम और मोहम्मद इब्राहिम — के नाम दर्ज पाए गए हैं। यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया तंत्र की विफलता का संकेत है।

जांच में सामने आया कि ये विदेशी नागरिक वर्षों से स्थानीय मुस्लिम बस्ती में रह रहे थे और उनके पास वैध अफगानी पासपोर्ट भी मिले हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान जब दस्तावेज़ी सत्यापन हुआ, तब जाकर यह खुलासा हुआ। सवाल यह है कि इतने वर्षों तक स्थानीय प्रशासन, पुलिस और निर्वाचन अधिकारियों की निगाहें इन पर क्यों नहीं गईं?

 जमशेदपुर का अफगानी कनेक्शन और राजनीतिक घमासान

राजनीतिक गलियारों में इस घटना ने आरोप-प्रत्यारोप का तूफ़ान खड़ा कर दिया है। भाजपा इसे “राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला” बताकर सरकार पर निशाना साध रही है, जबकि कांग्रेस और झामुमो इसे “चुनाव आयोग की प्रक्रिया में हुई त्रुटि” कहकर जांच के बाद कार्रवाई की बात कर रहे हैं।

जमशेदपुर का अफगानी कनेक्शन कांग्रेस के मुस्लिम तुष्टिकरण का प्रत्यक्ष प्रमाण – अभय सिंह

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अभय सिंह ने आईविजन से बातचीत करते हुए कहा कि जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा के बूथ संख्या 286 के मतदाता सूची में अफगानी नागरिकों का नाम दर्ज होना कांग्रेस के मुस्लिम तुष्टिकरण का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। सबसे मजे की बात है यह कि ये लोग पिछले कई दशकों से रह रहे हैं क्योंकि इन्हें कांग्रेस का खुला समर्थन प्राप्त था। उन्होंने कहा कि एसआईआर पहली बार हो रहा है ऐसी बात भी नहीं है। इसके पहले भी कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी कई बार एसआईआऱ हुआ लेकिन इन अफगानी नागरिकों की पहचान क्यों नहीं हो पाई यह सबसे बड़ा सवाल है। इसका सीधा सा जवाब है कि कांग्रेस मुस्लिमों को अपने वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करती रही है। हमारा यह मानना है कि देश में वहीं लोग रहे जो देश के नागरिक है या जिनके पास नागरिकता का वैध प्रमाणिक दस्तावेज हो। जो इस देश के नागरिक नहीं हैं अथवा जिनके पास नागरिकता के कोई वैध प्रमाणिक दस्तावेज नहीं है, उन्हें हर हाल में देश छोड़ कर जाना होगा। अभय ने कहा कि यह तो एक नमुना है पूरे प्रदेश ऐसे कितने घूसपैठीए छुपे होंगे, जिसकी पहचान करनी बहुत जरुरी है। इस मामले में पार्टी की जल्द बैठक होगी इसके बाद रणनीति तय होगी।

जांच में जो दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी – कुणाल षाड़गी

वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता कुणाल षाड़गी ने कहा अभी जांच की प्रक्रिया चल रही है। जांच मे जो भी दोषी पाया जाएगा। उसके खिलाफ निश्चित रुप से कार्रवाई होगी। एसआईआऱ सरकार तो नहीं करवा रही है, चुनाव आयोग के निर्देश पर आयोग के अधिकारी कार्यों का निष्पादन कर रहे है। इसलिए निश्चित रहें जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

मुद्दा विहीन विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है – परविंदर सिंह

आईविजन से बातचीत के क्रम में कांग्रेस जिला अध्यक्ष परविंदर सिंह ने कहा कि प्रदेश में भाजपा के पास कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए वह इस मुद्दे को तूल दे रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 16 साल से ज्यादा तो भाजपा की सरकार रही उसके बावजूद कांग्रेस पर दोष मढ़ना कहीं से भी उचित नहीं हैं। वहीं पिछले 20 वर्षों से ज्यादा समय से तो जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा से बीजेपी ही लगातार जीतती रही है। उसके बावजूद इस प्रकार के दोषारोपण करना यह बताता है कि बीजेपी के पास हिंदु मुस्लिम के अलावा कोई मुद्दा नहीं है। वह इसी मुद्दे पर देश को बांटकर राज करना चाहती है। परविंदर ने कहा कि चुनाव आयोग के अधिकारी पूरे मामले की जांच कर रहे हैं, जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

 इस राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप के बावजूद असली सवाल तो राजनीति से परे है कि क्या हमारी मतदाता सूची इतनी असुरक्षित हो चुकी है कि विदेशी नागरिक भी उसमें शामिल हो जाएं?

यह घटना प्रशासनिक सतर्कता की कमी और जमीनी स्तर पर सत्यापन तंत्र की कमजोरियों को उजागर करती है। यदि मतदाता सूची में विदेशी नाम दर्ज हो सकते हैं, तो यह न केवल लोकतांत्रिक विश्वसनीयता को चोट पहुंचाता है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा भी है।

भारत निर्वाचन आयोग को इस मामले को केवल स्थानीय गलती मानकर नहीं छोड़ना चाहिए। ज़रूरत है कि पूरे राज्य में मतदाता सूची की पुनः समीक्षा और डिजिटल सत्यापन प्रणाली को और मज़बूत किया जाए।

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