JHAHIN/2014/58773

इंटरनेट डेटा खपत में बिहार बना देश कै नंबर 1 राज्य

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धर्मेंद्र कुमार

डिजिटल इंडिया अभियान के तहत देश के तकनीकी मानचित्र पर एक अभूतपूर्व और चौंकाने वाला उलटफेर देखने को मिला है। डेटा खपत और सक्रिय इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के मामले में बिहार ने देश के सबसे बड़े औद्योगिक और आर्थिक रूप से समृद्ध राज्य महाराष्ट्र को पीछे छोड़ते हुए नंबर वन का स्थान हासिल कर लिया है। यह खबर केवल एक सांख्यिकीय आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह पारंपरिक रूप से पिछड़े माने जाने वाले राज्य में सुलग रही एक मूक सामाजिक-आर्थिक क्रांति की तस्दीक करती है। यह बदलाव साबित करता है कि जब बात सूचना के लोकतंत्रीकरण की आती है, तो बुनियादी ढांचे की कमी के बावजूद डिजिटल समावेशन के मामले में बिहार ने एक लंबी लकीर खींच दी है।

इस ऐतिहासिक छलांग के पीछे बिहार के ग्रामीण अंचलों में बढ़ती डिजिटल पहुंच सबसे बड़ी वजह बनकर उभरी है। ट्राई और दूरसंचार मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट है कि बिहार में प्रति उपभोक्ता औसत मासिक डेटा खपत में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। जहां कुछ साल पहले तक इंटरनेट केवल शहरी आबादी और संपन्न वर्ग तक सीमित था, आज बिहार के सुदूर देहाती इलाकों, जैसे कोसी, सीमांचल और मगध के गांवों में स्मार्टफोन और सस्ते 4G/5G डेटा पैक्स ने लोगों की जीवनशैली को बदल दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता का प्रसार इतनी तेजी से हुआ है कि अब देश के कुल इंटरनेट ट्रैफिक में बिहार की हिस्सेदारी सबसे निर्णायक हो गई है।

हालांकि, इस शानदार उपलब्धि के साथ कुछ गंभीर संरचनात्मक और गुणात्मक चुनौतियां भी उभर कर सामने आई हैं, जिन पर नीति-निर्माताओं को गंभीरता से विचार करना होगा।

 क्या यह भारी-भरकम डेटा खपत केवल सोशल मीडिया (यूट्यूब, रील्स और मनोरंजन) तक सीमित है, या इसका उपयोग ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल बैंकिंग और कौशल विकास के लिए हो रहा है?

 पुरुषों की तुलना में ग्रामीण महिलाओं के पास इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच अब भी काफी सीमित है, जिसे दूर करना अनिवार्य है।

पहली बार इंटरनेट का उपयोग करने वाली एक बड़ी ग्रामीण आबादी के पास साइबर ठगी और वित्तीय धोखाधड़ी से बचने के लिए आवश्यक जागरूकता नहीं है।

यह उपलब्धि बिहार सरकार और केंद्र सरकार दोनों के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आई है। यदि इस विशाल इंटरनेट यूजर बेस को सही दिशा दी जाए, तो बिहार देश में ई-गवर्नेंस, डिजिटल लिटरेसी और आईटी-सक्षम सेवाओं (ITES) का एक बड़ा हब बन सकता है। समय आ गया है कि इस डेटा क्रांति को ‘मनोरंजन से रोजगार’ की ओर मोड़ा जाए। राज्य सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट आधारित कुटीर उद्योगों और डिजिटल स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि यह तकनीकी बढ़त बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करने और पलायन रोकने में सबसे बड़ा हथियार साबित हो सके।

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