नई दिल्ली। देश की राजधानी नई दिल्ली के ऐतिहासिक विज्ञान भवन में आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन “द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स – 2026” का रविवार को गरिमामय समापन हो गया। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा आयोजित इस वैश्विक महामंथन में दुनिया भर के पर्यावरण विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और 17 देशों के शीर्ष न्यायिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। दो दिनों तक चले इस सम्मेलन में बदलते मौसम चक्र, ग्लोबल वार्मिंग और न्यायिक व्यवस्था के जरिए पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने के रोडमैप पर विस्तृत चर्चा की गई।
पीएम मोदी ने किया था उद्घाटन: ‘प्रकृति का दोहन नहीं, पोषण हमारी परंपरा‘
इस बेहद महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने वैश्विक समुदाय को याद दिलाया कि भारत उन गिने-चुने देशों में शामिल है, जिसने अपने विकास लक्ष्यों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की प्रतिबद्धताओं को समय से पहले पूरा किया है। भारत के लिए पर्यावरण का मुद्दा केवल एक सरकारी नीति या वैश्विक समझौता नहीं है, बल्कि यह हमारी सदियों पुरानी संस्कृति और जीवनशैली का हिस्सा है। हम प्रकृति के शोषण में नहीं, बल्कि उसके पोषण में विश्वास रखते हैं।
NGT की अगुवाई में जुटे 17 देशों के जज और कानूनी विशेषज्ञ
सम्मेलन का मुख्य आकर्षण न्यायपालिका और पर्यावरण कानून के बीच का तालमेल रहा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के अध्यक्ष की मेजबानी में आयोजित इस कार्यक्रम में शामिल विभिन्न देशों के जजों ने इस बात पर मंथन किया कि कैसे सख्त कानूनी ढांचे के जरिए पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली ताकतों पर लगाम लगाई जा सकती है।
विशेषज्ञों ने माना कि अब समय आ गया है जब पर्यावरण के खिलाफ अपराधों को केवल नागरिक विवाद न मानकर भावी पीढ़ी के खिलाफ एक गंभीर अपराध माना जाए। 17 देशों से आए न्यायिक प्रतिनिधियों ने अपने-अपने देशों के ‘ग्रीन लॉ’ और केस स्टडीज साझा की, ताकि एक अंतरराष्ट्रीय न्यायिक नेटवर्क स्थापित किया जा सके।
सम्मेलन के 3 मुख्य बड़े निष्कर्ष
विकास के नाम पर जंगलों की कटाई और कार्बन उत्सर्जन करने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों के खिलाफ ‘प्रदूषक भुगतान करे’ के नियम को और कड़ा किया जाएगा। विकसित देशों द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण की कीमत विकासशील और गरीब देशों को चुकानी पड़ रही है। सम्मेलन में मांग की गई कि प्रदूषण फैलाने वाले अमीर देश गरीब देशों को ‘क्लाइमेट फंड’ और नई ग्रीन टेक्नोलॉजी आसानी से उपलब्ध कराएं। पर्यावरण नीतियों में स्थानीय समुदायों और युवाओं को सीधे जोड़ने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और स्थानीय स्तर पर पर्यावरण अदालतों के विस्तार पर सहमति बनी।
हरित भविष्य के लिए साझा संकल्प के साथ समापन
समापन सत्र के दौरान सभी प्रतिभागी देशों ने एक साझा घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए, जिसे ‘दिल्ली पर्यावरण संकल्प-2026′ का नाम दिया जा रहा है। इसके तहत सभी देश पर्यावरण से जुड़े मुकदमों के त्वरित निपटारे और प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक-दूसरे के साथ तकनीकी और कानूनी जानकारियां साझा करेंगे। एनजीटी ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए उम्मीद जताई कि यहां तैयार की गई नीतियां आने वाले समय में वैश्विक पर्यावरण आंदोलन की रीढ़ बनेंगी।














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