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पुरी-बड़ामपहाड़ एक्सप्रेस को रेलवे बोर्ड की मंजूरी, 28 अक्टूबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दिखाएंगी हरी झंडी

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टाटानगर समेत कोल्हान और ओडिशा के यात्रियों को मिलेगी सीधी रेल कनेक्टिविटी, सप्ताह में छह दिन के बजाय प्रतिदिन परिचालन की तैयारी

जमशेदपुर। टाटानगर समेत कोल्हान और ओडिशा के रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। पुरी-बड़ामपहाड़ एक्सप्रेस के परिचालन को रेलवे बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। इस ट्रेन के शुरू होने से झारखंड और ओडिशा के बीच रेल संपर्क और मजबूत होगा। चक्रधरपुर रेल मंडल के डीआरएम तरुण हुरिया के अनुसार, 28 अक्टूबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बड़ामपहाड़ से पुरी के लिए चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगी। इस अवसर पर राष्ट्रपति के गृह क्षेत्र रायरंगपुर रेलवे स्टेशन पर भी कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

रेलवे बोर्ड की ओर से 19 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के बाद ट्रेन के परिचालन की तैयारियों को गति मिली है। प्रस्तावित ट्रेन संख्या 18411/18412 के परिचालन से टाटानगर, चाईबासा, राजखरसावां और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। पहले इस ट्रेन के सप्ताह में छह दिन चलने की जानकारी सामने आई थी, लेकिन डीआरएम तरुण हुरिया के अनुसार, बड़ामपहाड़ से पुरी के बीच ट्रेन का परिचालन प्रतिदिन किया जाएगा। परिचालन की विस्तृत समय-सारिणी और अन्य जानकारियां रेलवे की ओर से जारी की जाएंगी।

टाटानगर स्टेशन पर भी होगा ठहराव

रेलवे बोर्ड की ओर से जारी समय-सारिणी के अनुसार, पुरी से बड़ामपहाड़ जाने के दौरान ट्रेन का टाटानगर स्टेशन पर रात 11:30 बजे आगमन और 11:40 बजे प्रस्थान निर्धारित किया गया है। वहीं, वापसी में बड़ामपहाड़ से पुरी जाने के दौरान ट्रेन शाम 5:55 बजे टाटानगर पहुंचेगी और 6:05 बजे आगे के लिए रवाना होगी।

टाटानगर में ठहराव होने से जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को ओडिशा आने-जाने के लिए एक अतिरिक्त रेल सुविधा मिलेगी। इससे धार्मिक यात्रा, पर्यटन, व्यापार और पारिवारिक आवागमन करने वाले लोगों को सहूलियत होगी।

पर्यटन और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

पुरी स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों और व्यापारियों को भी इस ट्रेन से लाभ मिलेगा। टाटानगर और चाईबासा जैसे प्रमुख क्षेत्रों से बेहतर रेल संपर्क मिलने पर यात्रियों का समय और परेशानी कम हो सकती है। इसके साथ ही झारखंड और ओडिशा के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूती मिलने की संभावना है।

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