जमशेदपुर। संभावित चक्रवात ‘अरनब’ के 28 अक्टूबर को तट से टकराने की आशंका को देखते हुए रेल मंत्रालय ने यात्री सुरक्षा और रेलवे परिचालन को सुचारू बनाए रखने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने चक्रवात से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की। दक्षिण तटीय रेलवे और पूर्व तटीय रेलवे के संवेदनशील रेलखंडों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

रेलवे के अनुसार, लगभग 600 किलोमीटर रेलमार्ग पर चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है। इसमें विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम मंडलों के संवेदनशील क्षेत्र शामिल हैं। संभावित व्यवधानों से निपटने और प्रभावित रेल सेवाओं को जल्द बहाल करने के लिए जोनल, मंडल और रेलवे बोर्ड स्तर पर वॉर रूम सक्रिय कर दिए गए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों को भी प्रमुख स्थानों पर तैनात किया गया है।
छह स्थानों पर राहत सामग्री से भरी वैगन तैनात
आपातकालीन मरम्मत कार्यों में तेजी लाने के लिए कृष्णा कैनाल, बिट्रागुंटा, मामिडिपुडी, विशाखापत्तनम, पलासा और पोंडुरू में मरम्मत सामग्री से भरी वैगन तैनात की गई हैं। इसके अलावा, प्रमुख रेलवे जंक्शनों पर डीजल इंजन, पावर यूनिट और एंबुलेंस को तैयार रखा गया है। पेड़ों के गिरने, पटरियों पर अवरोध आने और अन्य संभावित नुकसान से निपटने के लिए अर्थमूवर, पेड़ काटने वाली मशीनें और बहाली से जुड़े उपकरण भी अलग-अलग स्थानों पर उपलब्ध कराए गए हैं।
हर घंटे मौसम और जलस्तर की निगरानी
चक्रवात की स्थिति पर नजर रखने के लिए हवा की गति और जलस्तर की हर घंटे जांच की जा रही है। इससे रेलवे पुलों, पटरियों और अन्य बुनियादी ढांचे पर संभावित खतरे का समय रहते आकलन किया जा सकेगा। अधिकारियों को सतर्क रहने और जरूरत के अनुसार तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
आपदा प्रबंधन एजेंसियों से समन्वय
रेलवे प्रशासन राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और संबंधित राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है। इसका उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना और यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना है।














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