दुमका। स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्सिंग के माध्यम से दिन-रात अपनी सेवाएं दे रहे कर्मियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। अब उन्हें न केवल सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी मिलेगी, बल्कि उनके पारिश्रमिक का भुगतान भी तय समय पर किया जाएगा। ठेकेदारों की मनमानी पर लगाम कसते हुए अपर श्रमायुक्त कार्यालय, दुमका (संयुक्त श्रम भवन) ने एक बेहद सख्त निर्देश जारी किया है।झारखंड के पैरामेडिकल स्टाफ एसोसिएशन ने हाल ही में एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें बताया गया था कि स्वास्थ्य विभाग के अधीन काम कर रहे आउटसोर्सिंग कर्मियों का शोषण हो रहा है। कर्मियों को न तो समय पर मानदेय दिया जा रहा है और न ही सरकारी नियमों के अनुसार न्यूनतम मजदूरी मिल रही है। इसे श्रम अधिनियम का सीधा उल्लंघन मानते हुए श्रम विभाग ने त्वरित कार्रवाई की है।इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुए श्रम अधीक्षक ने दुमका के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, जिला यक्ष्मा पदाधिकारी और फूलो झानो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के अधीक्षक को एक महत्वपूर्ण पत्र भेजा है। पत्र में साफ तौर पर निर्देश दिया गया है कि वे अपने स्तर से आउटसोर्सिंग एजेंसियों को सख्त हिदायत दें कि कर्मियों के अधिकारों के साथ कोई समझौता न हो।इस निर्देश की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विभाग ने व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता 2020 की धारा 55 और ठेका मजदूर अधिनियम की धारा 21(4) का हवाला देते हुए मुख्य नियोजक की जिम्मेदारी तय कर दी है। इसके तहत, अगर कोई ठेकेदार या आउटसोर्सिंग एजेंसी समय पर कर्मियों को पूरा पैसा नहीं देती है या कम भुगतान करती है, तो यह मुख्य नियोजक की जिम्मेदारी होगी कि वह कर्मियों को उनके बकाये का भुगतान करे। बाद में यह रकम संबंधित ठेकेदार को किए जाने वाले भुगतान से काट ली जाएगी।श्रम विभाग के इस कड़े रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि अब आउटसोर्सिंग एजेंसियों की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस फैसले से अल्प वेतन पर काम करने वाले सैकड़ों स्वास्थ्य कर्मियों को उनके पसीने की पूरी और समयबद्ध कीमत मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
दुमका: आउटसोर्सिंग कर्मियों का हक मारने वाले ठेकेदारों की खैर नहीं, न्यूनतम मजदूरी और समय पर भुगतान का सख्त निर्देश














Leave a Reply