सरायकेला। ईचागढ़ और आसपास के वन क्षेत्रों में हाथियों की आवाजाही को लेकर वन विभाग पूरी तरह सतर्क है। सरायकेला के वन प्रमंडल पदाधिकारी (डीएफओ) सबा आलम अंसारी ने हाथियों की वर्तमान स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी देते हुए बताया कि हाथियों की गतिविधियों पर विभाग निरंतर नजर बनाए हुए है, जिससे मानव-हाथी संघर्ष पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

डीएफओ ने बताया कि वर्तमान में चाकुलिया रेंज में 15 हाथियों का एक झुंड विचरण कर रहा है। यह झुंड फिलहाल जंगलों तक ही सीमित है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को किसी प्रकार की परेशानी या नुकसान का सामना नहीं करना पड़ा है। इसके अतिरिक्त, सरायकेला प्रमंडल के ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र में भी दो हाथियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। ये दोनों हाथी भी जंगलों में घूम रहे हैं।
हाथियों की गतिविधियों और आबादी वाले क्षेत्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने क्यूआरटी (क्विक रिस्पांस टीम) को तैनात किया है। डीएफओ के अनुसार, क्यूआरटी लगातार हाथियों की निगरानी कर रही है, जिसका सकारात्मक परिणाम यह रहा है कि क्षेत्र में मानव-हाथी द्वंद्व की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है।
आगामी महीनों की योजना पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जनवरी-फरवरी के दौरान पश्चिम बंगाल की ओर से हाथियों का दलमा की तरफ आगमन शुरू हो जाएगा। हाथी दलमा वन्यजीव अभयारण्य के प्राकृतिक पर्यावास (हैबिटेट) का उपयोग करते हैं। वहीं, बंगाल और झारखंड सीमा पर हाथियों की रोकथाम के लिए पूर्व में खोदे गए एलीफेंट प्रूफ ट्रेंच (खाइयों) से जुड़े सवाल पर डीएफओ ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि ये खाइयां काफी हद तक भर चुकी हैं। इसके अलावा, उच्चाधिकारियों से भी यह निर्देश प्राप्त हुआ है कि इन खाइयों को पूरी तरह भर दिया जाए, ताकि हाथियों के स्वाभाविक आवागमन में किसी तरह की बाधा उत्पन्न न हो और वे सुगमता से अपने कॉरिडोर में विचरण कर सकें।
















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