नई दिल्ली। देश की राजनीति में एक बार फिर चुनावी पारदर्शिता को लेकर घमासान छिड़ गया है। विपक्षी दलों के गठबंधन ‘INDIA’ ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में बड़े पैमाने पर विसंगतियों का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को राजधानी दिल्ली में विपक्षी गठबंधन के सांसदों और दिग्गज नेताओं ने संसद भवन से चुनाव आयोग (ECI) मुख्यालय तक एक विशाल विरोध मार्च निकाला। विपक्षी नेताओं का दावा है कि कई राज्यों की मतदाता सूचियों से जानबूझकर लाखों वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जो लोकतंत्र की जड़ों पर सीधा प्रहार है।
राष्ट्रपति से मुलाकात और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
विरोध मार्च के बाद विपक्षी नेताओं का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल आज शाम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात करेगा। इस दौरान नेता राष्ट्रपति को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपेंगे, जिसमें चुनावी सूचियों में हुई गड़बड़ियों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की जाएगी।
विपक्ष के इस बड़े शक्ति प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों ने मध्य दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। चुनाव आयोग और संसद भवन के आसपास के रास्तों पर बहुस्तरीय बैरिकेडिंग की गई है। दिल्ली पुलिस ने आम जनता की सुविधा के लिए एक विस्तृत ट्रैफिक एडवाइजरी भी जारी की है, जिसमें लुटियंस दिल्ली और इंडिया गेट की तरफ आने वाले कई प्रमुख रास्तों को डायवर्ट किया गया है, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई: विपक्ष
मार्च के दौरान मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस, सपा, टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने कहा कि यह मार्च किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि देश के लोकतंत्र और नागरिकों के वोटिंग अधिकार की रक्षा के लिए है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग सत्तापक्ष के दबाव में काम कर रहा है और मतदाता पंजीकरण (फॉर्म 6) से जुड़ी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में चुनाव आयोग के निर्णयों को लेकर की गई टिप्पणियों के बीच विपक्ष के इस कदम ने राजनीतिक सरगर्मी को चरम पर पहुंचा दिया है। आने वाले दिनों में यह विवाद संसद से लेकर सड़क तक और गहराने के आसार हैं।
















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