दुमका । जिले में बढ़ते साइबर अपराध, डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी से प्रभावित लोगों को समय पर न्याय दिलाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने एक बड़ी पहल की है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुधांशु कुमार शशि के आदेश पर शुक्रवार को न्यायालय परिसर के न्याय सदन में साइबर अपराध पीड़ित सहायता केंद्र की शुरुआत की गई है।
मुफ्त कानूनी मदद और सही मार्गदर्शनअक्सर साइबर अपराध का शिकार होने के बाद लोगों को यह समझ नहीं आता कि वे शिकायत कहां दर्ज कराएं या किस अधिकारी से संपर्क करें। इसी उलझन को दूर करने के लिए यह केंद्र पीड़ितों को मुफ्त कानूनी सहायता, शिकायत दर्ज कराने की सही प्रक्रिया और कानूनी उपायों की जानकारी देगा। इसके साथ ही, नियम के तहत पात्र व्यक्तियों को मुफ्त में वकील भी उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि वे बिना किसी परेशानी के न्याय पा सकें।
डालसा ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर डराने वाले, डिजिटल अरेस्ट की धमकी देने वाले या संदिग्ध लिंक भेजकर ठगी करने वाले अपराधियों से सतर्क रहें। साइबर अपराधी अक्सर डर और लालच का फायदा उठाकर लोगों को जाल में फंसाते हैं। इसलिए कभी भी अपना ओटीपी, पासवर्ड या बैंक से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।
धोखाधड़ी होने पर तुरंत करें यह काम
अगर कोई व्यक्ति ऑनलाइन साइबर ठगी का शिकार हो जाता है, तो उसे बिना देर किए सबसे पहले साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए। इसके साथ ही अपने बैंक लेनदेन का विवरण, मैसेज और स्क्रीनशॉट जैसे जरूरी सबूतों को सुरक्षित रखना चाहिए ताकि कार्रवाई में आसानी हो। विधिक सहायता के लिए पीड़ित सीधे जिला विधिक सेवा प्राधिकार, दुमका से भी संपर्क कर सकते हैं।













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