JHAHIN/2014/58773

लातेहार: खाकी दागदार! थाने में आदिवासी महिला को उल्टा लटकाकर पीटने का आरोप; सीएम हेमंत सोरेन के निर्देश पर थाना प्रभारी समेत दो निलंबित

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लातेहार: झारखंड के लातेहार जिले के बरियातू (बारियातू) थाने से पुलिसिया बर्बरता की एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है। यहां हेरंज गांव की रहने वाली एक 33 वर्षीय आदिवासी महिला, पुनिया देवी, ने पुलिसकर्मियों पर थाने में बेरहमी से मारपीट करने, अमानवीय यातनाएं देने और जातिसूचक गालियां देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस मामले के सामने आने के बाद राज्य के आदिवासी संगठनों और झारखंड जनाधिकार महासभा ने जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

क्या है पूरा विवाद?

पीड़िता पुनिया देवी के अनुसार, 5 अक्टूबर को जब वह गांव के पास बकरियां चरा रही थीं, तभी बरियातू थाना प्रभारी (SHO) प्रभात कुमार दास तीन अन्य पुलिसकर्मियों के साथ सादे कपड़ों में वहां पहुंचे। पुलिस को शक था कि महिला पोस्ता (अफीम) की अवैध खेती और कारोबार से जुड़ी हुई है।

आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने महिला को जबरन उठाया और रास्ते भर जातिसूचक गालियां देते हुए दुर्व्यवहार किया। हद तो तब हो गई जब थाने ले जाकर महिला के पैर बांध दिए गए, उसे उल्टा लटकाया गया और डंडों से बर्बरतापूर्वक पीटा गया। महिला ने पुलिस पर शारीरिक व यौन दुर्व्यवहार करने तथा घर में शादी के लिए रखे 80 हजार रुपये जबरन छीनने का भी आरोप लगाया है। 6 अक्टूबर की रात को उसे इस शर्त पर छोड़ा गया कि वह पोस्ता खेती में अपनी संलिप्तता स्वीकार करने का वीडियो बयान दर्ज कराए।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सख्त, दिए कड़ी कार्रवाई के निर्देश

झारखंड जनाधिकार महासभा और ग्रामीणों द्वारा लातेहार एसपी कार्यालय के घेराव और भारी जनाक्रोश के बाद यह मामला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक पहुंचा। सीएम सोरेन ने घटना पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि “यह स्थिति किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है“। उन्होंने लातेहार पुलिस को तुरंत संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

थाना प्रभारी और आरक्षी सस्पेंड

मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद लातेहार एसपी कुमार गौरव ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बरियातू थाना प्रभारी प्रभात कुमार दास और कॉन्स्टेबल मनीष कुमार राम को निलंबित कर दिया है। मामले की जांच के लिए बालूमाथ के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी और एक महिला पुलिस अधिकारी के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई है। आदिवासी संगठनों ने सभी आरोपी पुलिसकर्मियों पर SC-ST एक्ट के तहत केस दर्ज कर जेल भेजने की मांग की है।

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